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स्थापना दिवस पर ग़ौसे आज़म फाउंडेशन ने किया ऐलान

राष्ट्रवादी एनजीओ, ग़ौसे आज़म फाउंडेशन का सदस्य, क़ाज़ी/ नायब क़ाज़ी (क़ाज़ी-ए-निकाह), मुफ़्ती/ नायब मुफ़्ती (क़ाज़ी-ए-शरअ) बनने के लिए, अपने सभी दस्तावेज़ों के साथ, रजिस्टर्ड हेड़ ऑफिस, जयपुर में आना होगा

जयपुर । ग़ौसे आज़म फाउंडेशन को 2 फरवरी 2021 को सरकार से मान्यता मिली थी। जबकि इसकी डीड को 21 सितम्बर 2020 को ही मोकम्मल मान्यता मिल चुकी थी।

ग़ौसे आज़म फाउंडेशन के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत मौलाना मोहम्मद सैफुल्लाह ख़ां अस्दक़ी ने कहा कि ग़ौसे आज़म फाउंडेशन ने एक साल में जितने बड़े बड़े काम किए हैं उसे सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के ज़रीया पुरा देश जानता है। इसे बताने की ज़रूरत नहीं है। जितने भी बड़े बड़े काम ग़ौसे आज़म फाउंडेशन ने अभी तक किया है, वे सभी काम, हर हर चंदा घर घर चंदा, वाले फंड़ा से नहीं किया गया ब्लकि ट्रस्टियों, सदस्यों, क़ाज़ियों और सहयोगियों द्वारा किया गया है और आगे भी इसी तरह किया जाएगा।

हज़रत मौलाना मोहम्मद सैफुल्लाह ख़ां अस्दक़ी ने कहा कि आज ग़ौसे आज़म फाउंडेशन को सरकार द्वारा मान्यता मिले एक साल हो गए है। इसी वजह से आज का दिन ग़ौसे आज़म फाउंडेशन के लिए स्थापना दिवस है।

हज़रत मौलाना मोहम्मद सैफुल्लाह ख़ां अस्दक़ी ने कहा कि स्थापना दिवस पर ग़ौसे आज़म फाउंडेशन ने कुछ ऐलान किया है, जो इस प्रकार है। ग़ौसे आज़म फाउंडेशन का जिसे भी सदस्य, क़ाज़ी/ नायब क़ाज़ी (क़ाज़ी-ए-निकाह), मुफ़्ती/ नायब मुफ़्ती (क़ाज़ी-ए-शरअ) नियुक्त होना है, उसका अहले सुन्नत व जमाअत (आला हज़रत) से होना अनिवार्य है और ग़ौसे आज़म फाउंडेशन के तमाम अग़राज़ व मक़ासिद (उद्देश्यों, Objectives) जैसे नामूसे इस्लाम पर पहरा देना, देश में प्यार की गंगा बहाना, ख़िदमते ख़ल्क़ वग़ैरा के लिए अपना तन, मन, धन, वक़्त लगाना अनिवार्य है। अगर देश के किसी भी हिस्से का कोई आदमी इन शर्तों को पुरा करना चाहे, तो वह अपने सभी दस्तावेज़ों के साथ, रजिस्टर्ड हेड़ ऑफिस, जयपुर तशरीफ़ लाए, उसका नियुक्ति पत्र जारी कर दिया जाएगा।

हज़रत मौलाना मोहम्मद सैफुल्लाह ख़ां अस्दक़ी ने कहा कि चूंकि अगस्त सितम्बर से नियुक्ति पत्र जारी करना बंद कर दिया गया था और जो लोग अपना वादा पुरा नहीं कर सके थे, उन्हें ख़ुदा हाफ़िज़ भी कहा जा चुका है। अब फरवरी महीने से एक बार फिर से नियुक्ति पत्र जारी करने का काम शुरू किया जा रहा है। इस बार भी जो वादा पुरा नहीं करेगा उसे भी ख़ुदा हाफ़िज़ कह दिया जाएगा।

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